26 अगस्त 2014 - 18:07
भारत में शरण लेने वाले रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति दयनीय।

म्यांमार से विस्थापित हुए रोहिंग्या मुसलमान इन दिनों नई दिल्ली में बहुत ही दयनीय स्थिति में रह रहे हैं।

अबनाः म्यांमार से विस्थापित हुए रोहिंग्या मुसलमान इन दिनों नई दिल्ली में बहुत ही दयनीय स्थिति में रह रहे हैं।
प्रेस टीवी के अनुसार म्यांमार से सैकड़ों विस्थापित हुए मुसलमान, इन दिनों दिल्ली में एक शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं जहां उन्हें भीषण स्वास्थ्य समस्या एवं कुपोषण का सामना है।
शकूरा बेगम नामक एक शरणार्थी महिला के शब्दानुसार “ हमें कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है। हमें अत्यधिक कठिनाइयों का सामना है। मेरे पिता की हाल में मृत्यु हो गयी क्योंकि हममें उनकी दवा का ख़र्च उठाने की क्षमता नहीं थी। हमें अपने बच्चों के लिए खाद्य पदार्थ और दवाओं की सख़्त ज़रूरत है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही रहे तो हमारा परिवार भूख से मर जाएगा।”
नई दिल्ली में कैंप में रह रहे रोहिंग्या मुसलमान अति निर्धनता व उपेक्षा का शिकार हैं और उनके बच्चों को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना है जिस पर तुरंत ध्यान दिए जाने की ज़रूरत है। दयनीय जीवन स्थिति, मौसम की मार और प्रदूषण ने रोहिंग्या मुसलमानों को शारीरिक रूप से कमज़ो कर दिया है। ज़्यादातर रोहिंग्या मुसलमान नौकरों की तरह काम करते हैं और वह पर्याप्त पैसा नहीं कमा पाते। उनमें से कुछ भीख मांग कर अपना पेट पाल रहे हैं क्योंकि उन्हें रोज़गार मिलना बहुत कठिन है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर भारत में एक कार्यक्रम चला रही है किन्तु उनका कहना है कि यूएनएचसीआर की सहायता न के बराबर है। एक आदमी ने अपनी व्यथा इन शब्दों में बयान की, “ मुझे अपने बच्चों की बहुत चिंता है। वह मौसम की वजह से बीमार हो जाते हैं और हमारे पास उन्हें अस्पताल ले जाने या उनके लिए दवाएं ख़रीदने के लिए पैसे नहीं हैं। मैं आपको क्या बताऊं। हमारी ज़िन्दगी समस्याओं से भरी हुयी है।”
भारत में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र संघ से रोहिंग्या मुसलमानों को तुरंत मानवीय सहायता पहुंचाने की अपील की है। इसी प्रकार इन कार्यकर्ताओं ने म्यांमार से मुसलमानों का जनसंहार रोकने की मांग की है।
ज्ञात रहे म्यांमार की लगभग छह करोड़ की आबादी का 5 प्रतिशत मुसलमान हैं। मानवाधिकार गुट म्यांमार सरकार की मुसलमानों की रक्षा करने में विफल रहने के कारण बारंबार निंदा कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार विश्व में जिन समुदायों का सबसे ज़्यादा जातीय सफ़ाया किया गया है उनमें रोहिंग्या मुसलमान भी हैं। म्यांमार में सांप्रदायिक दंगों में सैकड़ों मुसलमान मारे गए और घायल हुए। इसी प्रकार हज़ारों मुसलमानों को म्यांमार छोड़ने पर मजबूर किया गया।